Dream to Reality of Incubator. इनक्यूबेटर सपने से हकीकत तक
मार्टिन कोवी: मानवता की एक हृदय विदारक मिसाल
मार्टिन कोवी डॉक्टर नहीं थे। उनके पास न तो कोई मेडिकल लाइसेंस था और न ही उन्होंने कभी मेडिकल स्कूल की दहलीज़ को छुआ था। लेकिन उनके दिल में एक ऐसी आग थी जिसने 7,000 से ज़्यादा नन्ही ज़िंदगियों को मौत के मुँह से खींचकर उन्हें ज़िंदगी की गर्माहट दी।
1900 के दशक की शुरुआत में, जब दुनिया उपेक्षित या प्रताड़ित बच्चों को "प्रकृति की भूल" मानती थी और उनकी नाज़ुक साँसों को बेकार समझती थी, कोवी के दिल ने उनमें ज़िंदगी की चमक देखी। जहाँ वैज्ञानिकों के ठंडे शब्द थे, "उन्हें मरने दो," वहीं कोवी की आवाज़ में एक करुणा थी जो गूँजती थी, "नहीं, हम इन नन्ही ज़िंदगियों के लिए आखिरी साँस तक लड़ेंगे।"
उन्होंने कोनी द्वीप के मनोरंजन पार्क में एक शो किया। हाँ, एक शो! लेकिन यह शो कोई साधारण तमाशा नहीं था—यह एक पवित्र युद्ध था, जिसका उद्देश्य उन नन्ही ज़िंदगियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना था। दर्शकों से मिलने वाली टिकटों की मामूली बिक्री उन बच्चों की जीवनरेखा बन गई।
अस्पतालों ने इन नन्हीं ज़िंदगियों को ठुकरा दिया।
डॉक्टरों ने उनसे मुँह मोड़ लिया।
लेकिन कोवी ने उन्हें अपने दिल की गर्माहट में समेट लिया। वह उनसे प्यार करती थी, उनकी देखभाल करती थी और एक माँ की कोमलता से उनकी हर साँस थामे रहती थी।
उनकी अमूल्य प्रेरणा शिकागो विश्व मेले से मिली, जहाँ उन्होंने मुर्गी के अंडों के एक इनक्यूबेटर में एक नया सपना देखा—एक ऐसा सपना जिसमें ये उपकरण नन्हे-मुन्ने बच्चों को जीवन दे सकते थे। दुनिया ने इसे पागलपन कहा, लेकिन कोवी ने इसमें एक चमत्कार की झलक देखी।
1943 तक, जब उनका शो समाप्त हुआ, अमेरिका के हर अस्पताल में इनक्यूबेटर एक हकीकत बन चुके थे। जहाँ विज्ञान ने इन बच्चों को ठुकरा दिया था, वहीं कोवी के शो ने उन्हें जीवन की गोद में सौंप दिया।
मार्टिन कोवी के पास कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन उनके दिल में एक अटूट साहस, एक सपना और मानवता की ताकत थी जो पहाड़ों को हिला सकती थी। उन्होंने उन नन्हीं ज़िंदगियों के लिए आवाज़ उठाई जिन्हें दुनिया भूल चुकी थी।
आज, जब हजारों लोग अपनी सांसें गिन रहे हैं, तो उन्हें शायद यह पता नहीं होगा कि उनकी हर सांस के पीछे एक "गद्दार" के साथ एक दिली लड़ाई है - एक ऐसा युद्ध जिसमें मानवता, प्रेम और आशा ही एकमात्र हथियार हैं।

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